#अमरीकी प्रोफेसर ने बनाया ऐसा कंप्‍यूटर प्रोग्राम तो भविष्‍य भी बताता है

कानपुर

 यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैमरा लोगों की शक्ल देख कर बताता है कि वह भविष्य में अपराध कर सकते हैं या नहीं। डेलीमेल ने अपनी रिपोर्ट में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के फेमस रिसर्चर डॉक्टर माइकल कोजिंस्‍की के हवाले से बताया है कि उन्‍होंने हाल ही में बहुत ही अनोखा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम बनाया है। उनका दावा है कि यह AI प्रोग्राम सीसीटीवी कैमरे से मिलने वाली तस्वीरों में किसी भी व्यक्ति के चेहरे की बनावट और उनके फेशियल एक्सप्रेशन को देखकर उनके बारे में बहुत कुछ बता सकता है जैसे कि वह पुरुष है या महिला या फिर वो सामान्‍य इंसान है अथवा गे या लेस्बियन। इसके अलावा यह अनोखा फेशियल रिकग्‍नीशन प्रोग्राम पुलिस के लिए भी काफी मददगार साबित हो सकता है क्योंकि इसके द्वारा ऐसे लोगों की पहले से ही पहचान हो सकती है जोकि आगे आने वाले वक्त में खतरनाक क्रिमिनल एक्टिविटीज में इन्वॉल्व हो सकते हैं या फिर कानून तोड़ने वाला कोई काम कर सकते हैं।

किसी व्‍यक्ति की फोटो देखकर बता सकता है उसका आईक्‍यू लेवल और नजरिया
इस रिसर्च के आने के बाद से ही इसमें तमाम तरह के प्राइवेसी इश्यूज को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, हालांकि स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एकेडमिक विभाग ने दावा किया है कि इस प्रोग्राम में लोगों की जिंदगियां बचाने की क्षमता है। दरअसल डॉक्टर माइकल कोजिंस्‍की आजकल एक ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम पर काम कर रहे हैं जोकि किसी भी व्यक्ति के एक सिंगल फोटोग्राफ को देख कर यह बता सकता है कि उसका आईक्यू लेवल क्या है और वह किस पॉलिटिकल विचारधारा का है यानी कि इस एक फोटो को देखकर कंप्यूटर उस व्यक्ति से की जिंदगी से जुड़ी तमाम पर्सनल बातों को बताने में सक्षम होगा।

शुरुआती प्रोग्राम बताता था कि कोई इंसान पुरुष है या महिला या फिर गे
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स डॉक्टर माइकल कोजिंस्‍की के पिछले साल पब्लिश हुए एक रिसर्च पेपर ने काफी हंगामा मचा दिया था। क्योंकि उन्होंने दावा किया था कि उनका एआई प्रोग्राम किसी व्‍यक्ति की फोटो को देखकर यह जज कर सकता है कि वह व्यक्ति नॉर्मल है या फिर गे। इसके अलावा अब इन्हीं की रिसर्च पर आधारित उनका अपडेटेड प्रोग्राम लोगों के चेहरे को देखकर बता सकता है कि क्या वो लोग भविष्य में अपराध करेंगे या फिर नहीं।

फ्यूचर में फेस रीडिंग करेंगे AI कंप्‍यूटर प्रोग्राम
द गार्जियन से बातचीत में डॉ. कोजिंस्‍की ने बताया है कि यह टेक्नोलॉजी लोगों के फेशियल फीचर्स को एनालाइज करके एक 3डी फेस बनाती है और अपनी रिपाोर्ट देती है। बता दें कि लोगों के चेहरे के एक्‍सप्रेशन उनकी बॉडी में मौजूद अलग-अलग टेस्टोस्टेरोन लेवल पर निर्भर करते हैं। इसी के आधार पर व्‍यक्ति के बारे में कई तरह के पर्सनल अनुमान लगाए जाते हैं। डॉक्टर माइकल कोजिंस्‍की की रिपोर्ट को लेकर कई मनोवैज्ञानिक दावा करते हैं कि भविष्य में ऐसे सीसीटीवी कैमरे आ सकते हैं जो लोगों की फेस रीडिंग कर सकेंगे और यह जान सकेंगे कि क्या कोई व्यक्ति खो गया है, या फिर वह ह्यूमन ट्रैफिकिंग का शिकार बन गया है या फिर वह आम लोगों के लिए खतरा बन सकता है।

शुरुआती कंप्‍यूटर प्रोग्राम ने चेहरा देखकर ठीक ठीक पहचाने थे क्रिमिनल्‍स
बता दें कि डॉक्टर माइकल कोजिंस्‍की द्वारा पेश की गई ये रिसर्च साल 2016 में की गई एक स्टडी के आधार पर काम करती है। उस स्‍टडी में चीन के 18 से 55 साल के करीब 1856 लोगों के चेहरे कंप्यूटर में फीड किए गए। इनमें से 730 फोटोज किसी-न-किसी क्रिमिनल्स की थी लेकिन उन तस्वीरों के साथ कोई भी छेड़छाड़ नहीं की गई थी। इसके बाद जब इन तस्वीरों को कंप्यूटर प्रोग्राम में डाला गया तो इस प्रोग्राम ने उनमें से क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले लोगों के चेहरों को काफी हद तक सही पहचाना। इसका आधार था उनके चेहरे की बनावट में कुछ अजीब अंतर, हालांकि तमाम क्रिटिक्स इस कंप्यूटर प्रोग्राम की जबरदस्त आलोचना कर चुके हैं।