महाप्रभु की स्नानयात्रा में उमड़े श्रद्धालु, जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंजा बड़दांड

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#साल भर में एक दिन यानी आज के ही दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान का प्रत्यक्ष स्नान होता है। अन्यथा हर दिन महाप्रभु को बिम्ब स्नान कराया जाता है।

महाप्रभु श्री जगन्नाथ के रथयात्रा का आद्यपर्व स्नान यात्रा देखने श्रीक्षेत्र धाम पुरी में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। सुबह चतुर्धा विग्रहों को धाड़ी पहंडी (रस्म) करवा कर स्नान मंडप पर लाया गया। महाप्रभु की 12 प्रमुख यात्राओं में से स्नान यात्रा सबसे पहली यात्रा मानी जाती है। श्री मंदिर के अपने रत्नसिंहासन से बाहर आकर महाप्रभु भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन देते हैं। साल भर में एक दिन यानी आज के ही दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान का प्रत्यक्ष स्नान होता है। अन्यथा हर दिन महाप्रभु को बिम्ब स्नान (रस्म) कराया जाता है।

अर्थात दर्पण में प्रभु के विग्रह का स्नान काया जाता है। आज 108 घड़े से महाप्रभु का प्रत्यक्ष स्नान गया। श्री मंदिर के परिसर में स्थित शीतला माता मंदिर के सामने स्थित सुवर्ण कूप से जल संग्रहित कर लाया गया। भगवान जगन्नाथ को 35 घड़ा, बलदेव जी को 33 घड़ा, देवी सुभद्रा को 22 घड़ा और सुदर्शन जी को18 घड़ा जल से स्नान कराया गया। साल भर में आज का ही एक मात्र दिन होता है जब महाप्रभु की दैनन्दिन रीतिनीति मंदिर से बाहर संपन्न कराई जाती है। स्नान मंडप पर ही भगवान की मंगल आरती होती है।

दोपहर 12.15 बजे स्नान मंडप पर विग्रहों की पूजा अर्चना की गई। दोपहर 1.15 बजे पूजा अर्चना के उपरांत महाप्रभु को स्नान कराया गया। चुआ, चंदन, कपूर मिश्रित इस सुबाषित जल से भगवान के स्नान के उपरांत पुष्पाभिषेक की नीति कराई गई। शाम को महाप्रभु का गजानन वेश सजाया गया। गजानन वेश देखने उमड़े श्रद्धालु बालेश्वर में स्थानीय बालगोपालपुर के इमामी नगर स्थित उत्तर ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु, भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा का स्नान पूर्णिमा अनुष्ठान विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। गुरुवार को सुबह 6:30 बजे मंगल अर्पण, साढ़े आठ बजे दधि पहांडी, दोपहर 12:46 बजे महास्नान, अपराह्न तीन बजे गजानन वेश, 4 बजे छप्पन भोग एवं शाम 6:45 बजे आरती संपन्न की गई। इस दौरान सुबह 10 बजे से लेकर रात आठ बजे तक भक्तों के बीच प्रसाद वितरण चलता रहा।महाप्रभु की स्नान यात्रा देखने के लिए पडोसी राज्यों से भी सैकड़ों की तादात में श्रद्धालु पहुंचे थे।