इसलिए मनाया जाता है विश्व जनसंख्या दिवस


 विश्व जनसंख्या दिवस हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ हर सेकंड दुनियाभर में बढ़ रही आबादी को ध्यान में रखते हुए मनाया जाता है। बता दें कि इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की शासी परिषद द्वारा 1989 में की गई थी। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब दुनियाभर में लोगों की आबादी का आंकड़ा लगभग 500 करोड़ के आस-पास पहुंच गया, तो विश्व स्तर पर विभिन्न समुदाय की मांगो के बाद तय किया गया कि हर साल 11 जुलाई को वर्ल्ड पॉपुलेशन डे मनाया जाएगा।

विश्व जनसंख्या दिवस के हिंदी में स्लोगन
वर्ल्ड पॉपुलेशन डे 2018 की थीम है ‘फैमिली प्लानिंग इज ए ह्यूमन राईट’ यानी कि ‘मानव अधिकार है परिवार नियोजन।’ इसके बाद इस साल का दूसरा थीम है, ‘फैमिली प्लानिंग इज फ्यूचर प्लानिंग’ यानी कि ‘परिवार नियोजन करें भविष्य संवारें।’ तीसरी थीम है, ‘छोटा परिवार सुख का आधार’, चौथी थीम है ‘हम दो हमारे दो’ और पांचवीं थीम है ‘बेटा हो या बेटी, बच्चे दो ही अच्छे।’ क्या आप जानते हैं कि आने वाले कुछ सालों में दुनिया की 68 प्रतिशत आबादी शहरों में रहने लगेगी।

1950 में सिर्फ 30 प्रतिशत लोग रहते थे शहरों में

जी हां, ये सुनकर थोड़ी हैरानी जरूर होगी लेकिन ऐसा ही है। दरअसल, संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया है कि वैश्विक स्तर पर 2018 में गाँव छोड़कर शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आबादी बढ़कर 55 प्रतिशत हो गई है। इसी रिपोर्ट के मुताबिक, 1950 में दुनिया में सिर्फ 30 प्रतिशत लोग शहरों में रहा करते थे। अब संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि 2050 तक दुनिया की संभावित 68% आबादी शहरी क्षत्रों में रहने लगेगी। आज उत्तर अमेरिका की 82 प्रतिशत, लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई की 81 प्रतिशत, यूरोप की 74 प्रतिशत और ओशिनिया की 68 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में है

भारत की सिर्फ 35 प्रतिशत आबादी रहेगी शहरों में
एशिया में शहरीकरण का स्तर अब 50% प्रतिशत तक पहुंच गया है। हालांकि अफ्रीका अभी भी इन सभी देशों से अलग है क्योंकि यहां की ज्यादातर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में है, इस देश की सिर्फ 43% आबादी शहरों में रहती है। 2018 से लेकर 2050 तक के बीच सिर्फ तीन देशों की आबादी का शहरों में 35 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। उन देशों में भारत, चीन और नाइजीरिया शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 2050 तक भारत की 416 मिलियन, चीन की 255 मिलियन और नाइजीरिया की 189 मिलियन आबादी का शहरों में रहने का अनुमान है।