Maharashtra Mumbai

सुपरकॉप हिमांशु रॉय की आत्महत्या से मुंबई पुलिस में शोक की लहर

Written by SM Bureau

राज्य के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस तथा सुपरकॉप के नाम से प्रसिद्ध आईपीएस अधिकारी हिमांशु रॉय ने आत्महत्या कर लिया है। आज शुक्रवार की दोपहर करीब 1.40 बजे उन्होंने दक्षिण मुंबई स्थित अपने सरकारी आवास स्थित अपने शयनकक्ष में अपनी सर्विस रिवॉल्वर से स्वयं को गोली मार लिया। आत्महत्या करने के लिए उन्होंने अपनी सर्विस रिवॉल्वर की नली को अपने मुंह में डालकर गोली चला दिया।

अपने कर्तव्य के प्रति बेहद सख्त, अनुशासनप्रिय और उतने ही जिंदादिल पुलिस अधिकारी के रूप में प्रसिद्ध हिमांशु रॉय की आत्महत्या से समूचा मुम्बई पुलिस महकमा सदमे में आ गया है। उनके जिंदादिल स्वभाव को जानने वाले इस बात पर भरोसा ही नहीं कर पा रहे हैं कि उन्होंने आत्महत्या कर लिया है। सूत्रों के अनुसार वे बहुत समय से बोन कैंसर से पीड़ित थे। संभवतः वे अपनी बीमारी और बीमारी से उपजी लाचारी व निराशा से बुरी तरह से निराश हो गए थे।

आज काफी वक़्त तक वो अपने ही कमरे में बंद थे। दोपहर को उनके कमरे से गोली की आवाज़ आते ही उनके परिवार वाले भाग कर शयनकक्ष में गए तो देखा कि वे बिस्तर के पास ही गिरे थे और काफी खून बह रहा था।
घरवाले उन्हें तत्काल बॉम्बे हॉस्पिटल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का अथक प्रयास किया लेकिन असफल रहे। हिमांशु रॉय ने अपने मुँह के अंदर पिस्टल की नली डालकर गोली मारी थी जिसके चलते उन्हें बचाना बेहद मुश्किल हो गया था।

मुंबई पुलिस के अत्यंत कुशल पुलिस अधिकारियों में शुमार IPS अफसर हिमांशु रॉय के बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं कि कैंसर से हारकर अपनी ज़िंदगी खत्म करने वाले इस अफसर को सिर्फ दो ही शौक़ था। एक तो अच्छा खाना और दूसरा अपना शरीर बनाना। हिमांशु रॉय को जिम से बेहद लगाव था। वो कितना भी बिज़ी क्यों न रहें, जिम जाना नहीं छोडते थे। उनके साथियों के मुताबिक, हिमांशु रॉय की पहचान डिपार्टमेंट में बेहद सख्त अफसर के तौर पर की जाती थी।
हिमांशु रॉय लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। वो कठिन परिश्रम करने वाले अफसर थे पर कई महीनों से बीमारी की वजह से परेशान रहने लगे थे। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार अक्सर वो अपनी पत्नी से भी झगड़ा करने लगते थे।

सुपरकॉप थे हिमांशु

मुंबई पुलिस और मीडिया में हिमांशु रॉय की पहचान सुपर कॉप की थी। हर अपराध को वो बेहद गंभीरता से लेते थे। जब साल 2013 में आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आया उन्होंने किसी भी हाई प्रोफ़ाइल व्यक्ति को नहीं छोड़ा था। इस मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां हुई थी। उन्होंने दाऊद गैंग के खात्मे और दाऊद की संपत्ति को जब्त करने में भी अहम् भूमिका निभाई थी।
इसके अलावा अंडरवर्ल्ड की कवरेज करने वाले चर्चित पत्रकार जे डे की हत्या की गुत्थी को भी उन्होंने सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी। 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हिमांशु रॉय बीमारी के चलते 2016 से ऑफिस नहीं जा रहे थे।

हिमांशु रॉय ने निम्न प्रकरणों को स्वयं सुलझाया था-

1- मुम्बई में आईपीएल मैच बेटिंग मामला
2- पत्रकार जेडे हत्याकांड
3-लैला खान हत्या मामला
4- दाउद के भाई इकबाल कसकर के ड्राइवर फायरिंग मामला

हिमांशु रॉय का प्रोफाइल

# वर्ष 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी

# मुंबई पुलिस के जॉइंट CP (क्राइम)
# Ats चीफ मुंबई
# ADGP राज्य

मुम्बई के पूर्व पुलिस अयुक्त अरूप पटनायक ने कहा कि वे यह घटना सुनकर स्तब्ध हैं. पटनायक ने रॉय की मौत को ‘पूरी तरह से अविश्वसनीय’ बताया है. पटनायक का हिमांशु रॉय से नाता तब से था जब वे मुंबई के पुलिस उपायुक्त हुआ करते थे.

आईपीएल और ज्योतिर्मय डे (जेडे) केस को याद करते हुए पटनायक ने कहा, मैंने उन्हें काफी तेज और परिष्कृत पुलिस अधिकारी के रूप में देखा. उन्हें फिटनेस का काफी शौक था. पटनायक ने आगे कहा, वे बेहद सुलझे हुए और शांत चित्त इंसान थे.

पटनायक पुलिस अधिकारी से रिटायर होने के बाद कोणार्क कैंसर फाउंडेशन चला रहे हैं. रॉय चूंकि कैंसर के मरीज थे, इसलिए पटनायक के साथ उनका बराबर से नाता बना रहा. पटनायक, रॉय पिछले तीन साल से कैंसर से पीड़ित थे. उन्हें इस बीमारी का पता तब चला जब उनके पूरे बदन में सूजन हो गई. तब तक काफी देर हो चुकी थी. कैंसर उनकी हड्डियों तक में फैल चुका था. इतना कुछ के बावजूद रॉय लगातार काम करते रहे. बीमारी के बाद पिछले दो साल में कुछ छुट्टियां लीं.

अरूप पटनायक ने कहा, मैं हिमांशु रॉय के साथ लगातार संपर्क में था. तीन महीने पहले उन्होंने मेरे से इस बीमारी के बारे में खास जानकारी मांगी. मैंने उन्हें एक डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी. वहां जाने पर पता चला कि कैंसर उनके दिमाग तक में पसर गया है. इसके बाद अंतिम विकल्प ऑपरेशन ही बचता था लेकिन रॉय शायद यह मान चुके थे कि इससे भी कुछ नहीं होने वाला है. यही कारण हो सकता है जो उन्होंने खुद को गोली मारी. यह मेरी धारणा है, बाकी तो पुलिस जांच में बात सामने आएगी.

पटनायक ने आगे कहा, लोग अगर यह सोचते हैं कि हिमांशु रॉय एक तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी थे, इसलिए वे कैंसर से लड़ सकते थे, तो यह बेवकूफी वाली बात होगी. बीमारी से क्या लड़ा जा सकता है? पटनायक ने पूछा, क्या तूफान या भूकंप से लड़ा जा सकता है? रॉय काफी दर्द में थे और उन्होंने अंत में इतना कड़ा कदम उठाया.
तीन महीने पहले जब पटनायक उनसे मिले तो उन्होंने कहा, सर मैं काफी दर्द में हूं. यह नहीं सहा जा रहा. कृपया आप मेरे लिए ईश्वर से दुआ कीजिए.

पटनायक ने कहा कि वे हिमांशु रॉय को लोगों के सामने एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में पेश करना चाहते हैं जो लगातार कैंसर से जूझते हुए भी अपना फर्ज निभाता रहा लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था. रॉय जैसी महान आत्मा से ऐसे काम की उम्मीद कतई नहीं थी.