मुम्बई का ओडिशा भवन किस काम का!

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मुंबई में रह रहे लाखों उड़िया प्रवासी और देश के अन्य प्रवासियों की अथक मेहनत से अब फानी समुद्री तूफान से पीड़ित उड़िया वासियों को राहत सामग्री भेजा गया है। पिछले दिनों 12000 लीटर पीने के पानी की बोतलों को रवाना किया गया था। इसी कड़ी में गुरुवार कि शाम 5 बजे मुंबई से सटे नवी मुंबई शहर के केरला भवन से 25 टन खाद्य राहत सामग्री व अन्य सामग्री संग्रहित करके 18 पहियों वाले ट्रक से रवाना कर दिया गया है। दुर्भाग्य की बात है कि यहां ओडिशा सरकार का ओडिशा भवन होने के बावजूद कोई सहायता नहीं मिली। इस खाद्य राहत सामग्री में 50 व 25 किलो की 300 बोरी पोहा, बिस्कुट से भरे 500 कार्टून, चावल की 100 किलो के 100 पैकेट, 5 टन गुड़, 500 टेंट बनाने लायक एक्सपोर्ट क्वालिटी तारपुलिन, 1500 टार्च, 3030 सैनिटरी नैपकिन, कपड़े धोने की साबुन की टिकिया व पावडर, नहाने का साबुन, मोमबत्ती इत्यादि सामग्री शामिल है।

25 टन राहत खाद्य सामग्री व 12000 लीटर पीने का पानी ओडिशा के पुरी जिले के लिए रवाना


पेशे से वरिष्ठ सीए आर. के. महापात्रा ने बताया कि हमने तीन मिशन बनाया था। एक अर्जेंट मिशन, दूसरा मीडियम टर्म तीसरा लांग टर्म मिशन। अर्जेंट मिशन में हमने 12000 लीटर पानी की बोतलें तूफान आने के 12 घंटे के भीतर हमने मुंबई से रवाना कर दिया था। मीडियम टर्म में हमने 20 टन खाद्य व अन्य सामग्री भेजने का लक्ष्य रखा था। पर सहायता अधिक मिलने यह लक्ष्य से अधिक 25 टन सामग्री भेज सके हैं। लांग टर्म में हम एक ऐसे गाँव को गोद लेंगे जो तूफान में सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। इस गांव के सब परिवार के लिए जो जरूरी है वह करेंगे।


प्रख्यात उद्योगपति रामप्रसाद मुदुली ने बताया कि ओडिशा के वीर शिवाजी कहे जाने वाले वीरशिरोमणि उत्कलमणि गोपबंधु दास का मूल गांव इस तूफान में बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यह गांव पुरी शहर से 25 किलोमीटर है को हम गोद लेने की योजना बना रहे हैं। मुदुली ने बताया कि ओडिशा तूफानपीड़ितों के लिये मुंबई व नवी मुंबई पुलिस ने भी बहुत सहयोग दिया है। रामप्रसाद मुदुली ने यह भी बताया कि ओडिशा तूफानपीड़ितों की मदद करने के लिए हम मुंबई के प्रवासी उड़िया समाज हर स्तर की मदद करना चाह रहे हैं पर दुर्भाग्य से ओडिशा राज्य सरकार अज्ञात कारणों से हमारी सहायता लेने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है।
रिलीफ के लिए आगे आए जगन्नाथ कैंसर फॉउंडेशन के डॉ. पी.के महंती ने बताया लाचार हुई ओडिशा सरकार की फनी सहायता टीम को 3 बार रिमाइंडर करने के बाद भी प्रवाशी ओडिया द्वारा इकठ्ठा किया गया 25 टन राहत सामग्री को रखने की जगह नही दिया गया जिसकी शिकायत हमने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ,पीएमओ के साथ ओडिशा सरकार के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत किया है ,महंती ने आगे बताया कि किसके इशारे पर राहत सामग्री को रखने की इजाजत नही दिया गया उसके ऊपर कड़ी करवाई किया जाए हम सभी प्रवाशी ओडिया मिलकर राज्य सरकार को पत्र लिखेंगे।
फनी राहत सामग्री के कोर कमिटी मेंबर रंजन रॉय ने बताया कि ओडिशा भबन किसके लिए बनाया गया है मुम्बई में रहने वाले लाखों प्रवाशी ओडिया भाइयो कि सुख दुःख में अगर शामिल नही है हमे नही चाहिए ओडिशा भवन,रॉय ने आगे कहा कि भवन के मैनेजर किसके इशारे पर काम करते है हमे पत्ता है जरूरत पड़ने पर बताया जाएगा यंहा कुछ गिने चुने लोगो के लिए मुम्बई ओडीशा भवन बदनाम हो चुका है जीस्का जिम्मदार भवन के मैनेजर है ।
संभवतः
यही कहा जाता है कि एक दरवाजा बंद होता है तो दूसरा दरवाजा निश्चय ही खुल जाता है। ताजुज्ब तो तब होता है, जहाँ लोग मुसीबत में हैं वहाँ की सरकार की चुप्पी साधे हुए है।

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