उड़ीसा सरकार का उदासीन रवैया ,नहीं पहुँच रहा है 20 टन राहत सामग्री

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मुंबई :  उड़ीसा के 14 जिलों में समुद्री चक्रवात से मची तबाही में बेघर हुए लोगों के मदद के लिए हजारों हाथ आगे आए हैं, लेकिन उड़ीसा सरकार के उदासीन अरे रवैया को देखते हुए तकरीबन दर्जनभर स्वयंसेवी संस्थान परेशान है। मुंबई के समीप नवी मुंबई इलाके में उड़ीसा भवन के पास Fani समुद्री तूफान में बेघर हुए लोगों को मदद के लिए रोजमर्रा के जरूरी सामान सहित पानी कपड़े खाने के सामान और दवाई लेकर उड़ीशा से संबंध रखने वाले सैकड़ों पहुँचे। तकरीबन 20 टन सामान लोगों ने अपने अपने क्षमता के हिसाब से इकट्ठा कर लिया है। लेकिन सरकार ना तो इन्हें उड़ीशा भवन में रखने की मंजूरी दे रहा है और ना ही उन्हें उड़ीशा भेजने का कोई साधन उपलब्ध करा रहा है फिलहाल केरला भवन में समान रक्खा गया है।

  • उड़ीसा सरकार का उदासीन रवैया ,
  • नहीं पहुँच रहा है 20 टन राहत सामग्री
  • मुंबई के उड़ीसा निवासियों ने इकट्ठा किया है राहत सामग्री ..
  • 6 लाख प्रवाशी ओडिया मुम्बई में रहते हैं।
  • 20टन राहत सामग्री इकट्ठा किया‌ है।
  • उडीसा‌ भवन ने रखने से मनाही की तो केरला भवन ने दिया जगह.
  • राहत सामग्री ट्रक के जरिए पहुँचाई जाएगी।


मुंबई में तकरीबन छोटे बड़े मिलाकर कई ओडिशा से संबंध रखने वाले संस्थाएं हैं जिन्होंने एक मंच पर आकर उड़ीशा में 5 लाख परिवार को मदद करने का बीड़ा उठाया है। उड़ीसा के सबसे ज्यादा नुकसान पूरी में हुआ है। जहाँ संपत्ति सहित जान का नुकसान भी हुआ है।पुरी सहित दूसरे 11 जिलों में हुए भारी नुक़सान ने लोगों को खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर कर दिया है।मुंबई से स्वयंसेवी संस्थानों ने उडीसा में भेजने के लिए, पीने के लिए पानी , पोहा , बिस्किट, कंबल , मोमबत्ती, माचिस,टॉर्च लाइट दवाएं,और दूसरे जरूरी सामान के साथ कुल 20 टन इक्ट्ठा करने के बाद नवी मुंबई के उड़ीशा भवन में रखने और सरकार की सहायता से जरूरतमंदों तक पहुँचाने के लिए पहुँचे। लेकिन उड़ीसा भवन के प्रबंधक और सरकार के प्रतिनिधि से जवाब कुछ ऐसा मिला कि -“आप किसी तरह का सामान यहाँ नहीं रख सकते।गृह मंत्रालय से कोई अनुमति नहीं दी गई है।” ये वाक्य‌ उड़ीसा भवन के मैनेजर कृपानिधी विस्वाल के जरिए कहे गए और साफ मना भी कर दिया गया ।
स्वयंसेवी संस्थाओं के मदद के लिए केरल सरकार की तरफ से मदद के हाथ आए जब इकट्टा किए गए सामान को सुरक्षित रखने की जगह प्रदान करने के साथ मदद का हाथ भी आगे बढाया।‌‌‌‌‌मुंबई में कुल छह लाख उड़ीशा से आए लोग रहते हैं जिन्होंने इस काम में मदद करने के लिए अपने अपने संस्थानों के जरिए सहायता करने का बीड़ा उठाया है। इस ऑपरेशन Fani Help को साकार रुप में अंजाम देने वाले पेशे से CA आर.के. महापात्रा के पत्रचार का जवाब सरकार के तरफ से अपनी असमर्थता दिखाते हुए आई कि समान रखने की स्थिती में नहीं जो कि बेहद हास्यास्पद प्रसंग नजर आया।हालांकि पहले ही दौर में तकरीबन 12 हजार पानी की बोतलों को आनन फानन में मदद के लिए भेज दिया गया है।आर.के. महापात्रा के मुताबिक “भले ही उड़ीसा सरकार मदद ना करे लेकिन हम अपना कर्तव्य जानते हैं और लोगों तक मदद पहुँचा कर रहेंगे। हमने हर दरवाजे पर जाकर इस सहायता के सामान इकट्ठा किया है। सरकार के लालफीताशाही में फँस कर लोगों के मदद से दूर नहीं रह सकते।”


हालांकि इस बाबत प्रवाशी ओडिया के द्वारा इकठ्ठा किया गया सामान को सुरक्षित पहुचाने का बीड़ा स्थानिक पोलिस प्रशासन ने भी साथ दिया है सामान को बगैर किसी व्यवसायिक शुल्क को उड़ीसा भेजने का आश्वाशन दिया है।तकरीबन 20 टन राहत सामग्री भेजकर सैकड़ों हजारों परिवार को विकट‌ परिस्थिती से उबारने का संकल्प लिए लोंगों की मदद जरूर हो सकेगी ।
सामान्यतः यही कहा जाता है कि एक दरवाजा बंद होता है तो दूसरा दरवाजा निश्चय ही खुल जाता है। ताजुज्ब तो तब होता है, जहाँ लोग मुसीबत में हैं वहाँ की सरकार की चुप्पी साधे हुए है।

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